Tuesday, July 18, 2006

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला

मित्रों, मुझे नहीं पता कि अपने चिट्ठे पर कीबोर्ड का यह सिपाही कितने दिनों तक लिख सकेगा. ख़बरे आईं हैं कि देश के कई हिस्सों में जाल सेवा प्रदाताओं ने चिट्ठाकारी की कई साइट पर पाबंदी लगा दी है. आतंकवादियों को पकड़ने में नाकाम रहा हमारा तंत्र अब इस तरह का तुगलकी फ़रमान जारी कर चुका है. यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आघात है. इसका विरोध किया जाना चाहिए. आईये, इस बेतुकी सेंसरशिप के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करें.
अब दस्तकों का दरवाज़ों पर होता नहीं असर

हर हथेली ख़ून से तरबतर होनी चाहिए
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए (दुष्यंत कुमार)

मीडिया युग नामक चिट्ठे के लेखक और मेरे मित्र भव्य श्रीवास्तव भी इसी तुगलकी आदेश का शिकार हुए हैं. लिहाज़ा इनका पोष्ट मैंने अपने चिट्ठे पर प्रकाशित किया है.

Hello Friends,

An undeniable fact that the "Right to expression" was curbed by the government in the name of security tantrums. Blogs are bard by the ISP in the order of government. MEDIA YUG condemn this. So unite expression is must. History shows us that the suppression was not aLways one head. Government has also indicated that the broadcastiong sector must controled by him. So he is carry forward to take the bill to the parliamnent.

Blogs becomes the lifeline of netizens, and the role it plays in crisis time is undefeatable.Tsunami, Quake, Attack, Disaster, and Blast, in all incidents the bloggers are always available with powerpacked information and help.

So why the governmant is acting like a draconian state. Same happening in china, resist the bloggers.

So kindly raise a voice against this atrocity.

We need your proper support. Also guidelines from you that, how we move forward to make a resistence against all this.

MEDIAYUG
A dedication


चाहता हूं निज़ामे कुहन बदल डालूं
ये बात फ़कत मेरे बस की नहीं.
हम सब की बात है
दो चार दस की बात नहीं.

अपनी आवाज़ बुलंद कीजिए और यहां चर्चा कीजिए

1 Comments:

Blogger ई-छाया said...

बहुत दुःख हुआ जानकर।

11:34 AM  

Post a Comment

<< Home