Sunday, August 06, 2006

क्यों हूं मैं मीडिया में ?

वे आठ कारण जिनकी वजह से मैं मीडिया में हूं-

मैं नींद से नफ़रत करता हूं.
मैं ज़िंदगी के मज़े ले चुका हूं.
मैं बिना तनाव लिए जी नहीं सकता.
मैं अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहता हूं.
मैं गीता पर विश्वास रखता हूं- कर्म करो लेकिन फल जाए भाड़ में.
मैं इस तर्क को झुठलाना चाहता हूं कि ज़िंदगी में हरेक चीज़ का मकसद होता है.
मैं अपने परिवार वालों से बदला लेना चाहता हूं.
मैं अपने दोस्तों से दुश्मनी मोल लेना चाहता हूं.

ज़ाहिर है कि ऐसे में मीडिया में रहने का ख़ामियाज़ा तो भुगतना ही होगा. वो भी ब्रॉडकास्ट मीडिया में. यानी कोढ़ पर खाज.

5 Comments:

Blogger Srijan Shilpi said...

आप तो इतने प्यारे इंसान हैं, नीरज जी। क्यों इस तरह की बातें लिखकर अपने बारे में भयावह छवि बनाने की व्यर्थ कोशिश कर रहे हैं। आप अब अच्छी-सी लड़की देखकर शादी के बंधन में बँध जाइए, फिर आपको मीडिया में होने के लिए ऐसे असहज तर्काधार तलाश करने की जरूरत नहीं होगी।

1:09 PM  
Blogger उन्मुक्त said...

'मैं नींद से नफ़रत करता हूं.'
मेरे लिये तो नींद सबसे प्यारी चीज है 'मुंह ढ़क कर सोईये आराम बड़ी चीज है'| नीरज भाई नींद के लिये तो ऐसा न कहें

5:21 PM  
Blogger SHASHI SINGH said...

अपने अतीत के अनुभव के आधार पर आपके गुस्से को समझ सकता हूं... मगर मेरे भाई इस दुनिया में कुछ भी स्थायी नहीं. निर्थक कवायद का यह दौर भी गुज़र जायेगा. और मज़े की बात... आपकी यह तड़प ही उसका आधार बनेगी. इसलिए तड़पिये और शिद्दत से तड़पिये... बंधन खुल जायेंगे.

10:43 PM  
Blogger Pankaj Bengani said...

आप अविवाहीत हैं !!!!!!!!!

तो फिर फटाफट शादी कर लिजीए!

फिर यह सोचने को फुर्सत नहीं मिलेगी...(ना यार कुछ ऐसा वैसा ना सोचो!! अरे घरेलु टंटों में ऐसा फंसोगे कि बाकी दुनिया हसीन ही हसीन लगेगी)

11:32 PM  
Anonymous Sindhu said...

ज़िन्दगी के तीन साल नष्ट हो गए, खुद को सज़ा देते देते। चुप रहके, अकेले रहके... ।
जब ये तर्क नहीं चला, खुद को भुलाने की कोशिश मे लग गए... बहुत सारे लोगों से मिलके, संगीत और मज़ाक का सहारा लेके।

इस लेख द्वारा आपने एक तीसरा रास्ता दिखा दिया है। आग की ज़रूरत थी, अब एक बहाना कम पड गया। थेंक्स नीरज।

हम जानते है मीडिया वालों को न थेंक्स की ज़रूरत होती है न स्वागत की। न सलाह की, न टिप्पणी की। फिर भी एक बात कहते है। दिल मे आग का होना ज़रूरी है, कुछ जज़्बातों को जलाने के लिए, मन्ज़िल को रोशन करने के लिए। लेकिन आग को और भडकने न दे, जो जलेगा वो आपका दिल होगा।

8:43 PM  

Post a Comment

<< Home