Thursday, August 10, 2006

रिश्ते की डोर और स्पर्श मात्र ने दी एक नई जिदंगी

अमर उजाला से साभार


गाजियाबाद. प्रार्थना करो कि चेतना के इस स्पर्श को हर कोई महसूस करे. रक्षा बंधन पर बहुतों ने राखी बांधी और बहुतों ने राखी बंधवाई लेकिन एक राखी ऐसी भी थी जिसकी जुबां नहीं थी. वह सिर्फ अहसासभर थी. मजहब के पार. जातिबंधन-खून के रिश्तों के पार. एक माह से अवचेतन चल रहे गर्वनर का हाथ बढ़ा और मुसलिम नर्स ने प्यार की प्रतीक राखी कलाई पर सजा दी--तुम जियो हजारों साल.

इसे ईश्वर की माया या कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे कि भाई को बहन मिली तो सिर्फ स्पर्श से. एक माह पहले गर्वनर एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल हो गया था. तभी से वह कोमा में चल रहा है. आईसीयू में भरती होने से परिजन भी ज्यादा नहीं मिल पाते थे. गर्वनर की सेवा करती थी एक नर्स सबीना नाज। सबीना के ही स्पर्श को गर्वनर महसूस करता था. जब भी वह उसके सिर पर हाथ रखती तो गर्वनर को लगता कि कोई अपना ही उसका हाल जान रहा है. यह केवल आंतरिक अनुभूति थी लेकिन इसी ने दोनों को प्यार के असीम रिश्ते से जोड़ दिया.
डाक्टरों ने गवर्नर को लगभग 25 दिन तक आईसीयू में रखा और इसी दौरान उसके सिर का बेहद नाजुक ऑपरेशन भी हुआ. इसके बाद धीरे-धीरे उसकी हालत में थोड़ा सुधार आया और अभी चार दिन पहले उसे आईसीयू से कमरा नं 201 में शिफ्ट किया गया है. यहां पर वैसे तो गवर्नर की सेवा अस्पताल स्टाफ और उसके परिजन सभी लोग कर रहे हैं लेकिन जब शबीना ने उसे स्पर्श किया तो गवर्नर के हाथ को थोड़ा जकड़ लिया. इस दृश्य को देखकर गवर्नर के परिजन हैरान रह गए. उन्हें लगा कि गवर्नर सबीना के स्पर्श को अर्ध कोमा में भी महसूस करता है. इधर गवर्नर के इस एहसास ने शबीना के मन को झकझोर दिया और उसने गवर्नर को अपना भाई बनाने का फैसला कर डाला.

गवर्नर हिंदू है और सबीना मुस्लिम. इसके बावजूद आज सबीना ने सभी धर्म जाति के बंधन को दरकिनार कर रक्षाबंधन के अवसर गवर्नर को अपना भाई मानते हुए राखी बांधी. सबीना ने न सिर्फ सामाजिक भेदभाव को मिटाने का प्रयास किया है बल्कि कौमी एकता की एक ताजा मिसाल भी पेश की है. ...और साथ-साथ रक्षा बंधन के असली सूत्र को भी साकार किया, बहन ने भाई के जिंदगी की प्रार्थना की और भाई ने बहन की रक्षा का संकल्प लिया. गवर्नर भले होश में नहीं, लेकिन सबीना कहती है कि रिश्ते की यह डोर कभी नहीं टूटने वाली है.
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समाचार लिखने वाले पत्रकार को मेरी ओर से धन्यवाद.

10 Comments:

Blogger MAN KI BAAT said...

उल्लेखनीय और अनुकरणीय।

5:08 PM  
Blogger Udan Tashtari said...

वाह नीरज भाई, बहुत बढियां समाचार निकाले हो.
समीर लाल

6:55 PM  
Blogger Jagdish Bhatia said...

आम आदमी राजनीति नहीं करता वो मन की बात को समझता है।

7:26 PM  
Blogger अनूप शुक्ला said...

कल समाचार में पढ़ा था। आज इसे दोबारा पढ़कर अच्छा लगा।

7:39 PM  
Blogger Pratyaksha said...

पढकर अच्छा लगा

9:21 PM  
Blogger Sagar Chand Nahar said...

बहुत बढ़िया नीरज भाई
मर्मस्पर्शी लेख है
राखी की शुरुआत भी कुछ इसी तरह हुई थी जब एक हिन्दू महारानी ने हुमायूँ को अपना भाई बनाया था।

2:10 AM  
Blogger rachana said...

मर्मस्पर्शी लेख है...

9:36 AM  
Anonymous SHUAIB said...

भला बताउ इस देश को छोड कर कहीं दूसरे देश मे ऐसा देखने और सुनने को मिले? ये भारत है और यहां का कल्चर हमारा धर्म है - जानकारी देने के लिए आपका धन्यवाद

10:22 AM  
Blogger संजय बेंगाणी said...

भारत को सलाम. आखिर हम हैं तो इंसान ही ना.
और सागर भाई राखी की शुरूआत हुमायु वाले किस्से से नहीं हुई थी.

6:56 AM  
Anonymous Sindhu said...

पढ़ कर मेरा मुर्दा दिल जाग उठा। शायद "रिश्ते" "कमिटमेन्ट" जैसे शब्द केवल शब्द नहीं।

इस मर्मस्पर्शी लेख के लिये धन्यवाद, नीरज।

8:12 PM  

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